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नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क] मंगलवार को धनतेरस था और इस अवसर पर तमाम लोग सोना खरीदते हैं। गुरुवार को दिवाली के अवसर पर भी सोने के जेवरात लेने वालों की कोई कमी नहीं। ऐसा ही कुछ अक्षय तृतिया के अवसर पर भी देखने को मिलता है, जब लोग सोना खरीदने के लिए लालायित हो उठते हैं। शादी-ब्याह जैसे ऐसे ही कई और मौके भी सालभर में आते रहते हैं, जब लोग यह की खरीददारी करते हैं।

सोने के जेवरात पहनने का शौक

सोने के जेवरात पहनने का शौक कमोबेश सभी को होता है। खासतौर पर भारत में महिलाओं का सोने के प्रति कुछ ज्यादा ही लगाव दिखता है। मांग टीका से लेकर, कान के बुंदे, नाक में पहनी जाने वाली नथ और गले के मंगलसूत्र, हाथों में कड़े तक न जाने कितने आभूषण हैं जो महिलाएं धारण करती हैं। पुरुष भी गले की चेन व अंगूठी के रूप में यह के प्रति अपने प्रेम का दर्शाते रहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर सोना धरती पर आया कैसे? आपका आभूषण बनने से पहले सोना किन-किन परिस्थितियों से गुजरता है और उसकी उत्पत्ति कैसे हुई? चलिए की यात्रा पर एक नजर डालते हैं… लेकिन हमारी यह यात्रा रिवर्स रहेगी…

ज्वैलर से आप तक पहुंचते हैं सोने के आभूषण

सोने के प्रति आपके लगाव और आपके मनपसंद डिजाइन को जो व्यक्ति समझता है उसे ज्वैलर कहा जाता है। ज्वैलर आपकी आंखों में भी जाने वाले डिजाइनों में सोने को ढालता है। ज्वैलर के पास ही जाकर आप किसी खास डिजाइन को पसंद करते हैं और यह के आभूषणों को अपने घर ले आते हैं। यहां एक बात गौर करने लायक यह भी है कि 24 कैरेट सोने के आभूषण नहीं बनते हैं। 24 कैरेट सोना लिक्विड फॉर्म में होता है और इसे आभूषण बनाने लायक कड़ा बनाया जाता है। इस तरह से के आभूषण 22 या 18 कैरेट के ही बनते हैं।

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