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कहावत है कि बूढ़े बाप के कंधों पर जवान बेटे के जनाजे से बड़ा दुख रफ्तार और कोई नहीं हो सकता। ऐसे ही दुखों का पहाड़ रविवार को एक पिता पर टूट पड़ा। बछरावां हादसे में तो उनका पूरा परिवार ही खत्म हो गया।

हादसे की सूचना पर पहुंचे बदहवास सब इंस्पेक्टर प्रेम चंद्र मिश्रा अपने पुत्र, बहू व बेटियों के शवों को देख कर बिलख पड़े। रोते-रोते बताया कि लगभग 15 वर्ष पूर्व उनकी पत्नी कुसलावती का कैंसर की बीमारी से निधन हो गया था। आज भगवान ने उनके जीवन की बची सारी आशाएं उनसे छीन ली। घर में बेटियां दीपावली की तैयारियां कर रही थी। बहू और बेटियों के कहने पर ही छुट्टियों में बेटा घर आया था। अब घर में दीपक कैसे जलेंगे।

साल भर पहले ही बेटे की शादी की थी कि घर में किलकारियां गूंजेंगी। यह बताते-बताते मृतक इंजीनियर के पिता फफककर रो पड़े। आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। आसपास खड़े लोगों ने कुछ ढांढस बंधाया तो बोल पड़े सुबह वह कौन सी मनहूस घड़ी थी, जब पूरा परिवार घर से निकल पड़ा। जा रहे थे माता रानी के दर्शन करने और मेरी क्या खता थी कि मेरे पूरे परिवार को ही माता रानी ने अपने पास बुला लिया। अब मैं किसके सहारे जीवन का आगे का सफर काटूंगा।

वही मृतक दिव्य के साथ गुड़गांव में कंपनी में साथ काम करने वाले गौरव वर्मा पुत्र डीके वर्मा के भी आंसू नहीं थम रहे थे। बिलख रहे गौरव का कहना था कि मृतक दिव्य कुमार मिश्रा ने फोन कर पूछा था कि विंध्याचल जाने का रास्ता कौन सा सही रहेगा। बातचीत में ही गौरव भी परिवार के साथ विंध्याचल जाने की इच्छा जताई और लखनऊ से रविवार तड़के चार बजे दोनों परिवार अलग-अलग गाड़ियों से विंध्याचल दर्शन के लिए निकल थे। क्या पता था कि विंध्याचल पहुंचने से पहले ही उनका दोस्त परिवार समेत इस दुनिया को छोड़ कर चला जाएगा। घटनास्थल का नजारा देखकर हर किसी की रूह कांप उठी। घटनास्‍थल का नजारा देखकर हर किसी की रूह कांप उठी। एसओ अनिल के मुताबिक कार की रफ्तार करीब 110 किमी प्रति घंटा थी।

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